अंकुरण-स्कूल ऑफ़ लीडरशिप
एक सफल और समृद्ध समाज के लिए Leadership Skills का होना अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। Leadership न केवल व्यक्ति को एक सफल जीवन जीने में मदद करते हैं, बल्कि समुदाय और राष्ट्र को भी सशक्त बनाते हैं।
प्रवेश परीक्षा आवेदन
हमारे बारे में
बालक की अन्तर्निहित शक्तियों को अभिव्यक्ति एवं विकास का अवसर प्रदान करना ही शिक्षा है ” स्वामी विवेकानंद के इस कथन के अनुसार शिक्षा केवल औपचारिक रूप से कुछ विषयों के शिक्षण तक ही सीमित नहीं रह जाती उसका उद्देश्य विस्तृत एवं व्यापक है इसमें बालक के सर्वांगीण विकास (शारीरिक, मानसिक, बौध्दिक, नैतिक तथा आध्यात्मिक) एवं सामाजिक विकास की कल्पना में औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ व्यक्तिगत क्षमताओं, प्रतिभाओं तथा सद्गुणों के विकास का वातावरण एवं अवसर प्रदान करना निहित है |
इसी thoughtful विचार के साथ हम ले कर आएं हैं, “अंकुरण-स्कूल ऑफ़ लीडरशिप।”
शैक्षणिक
प्रवेश सम्बन्धी नियम
1. नर्सरी कक्षा में प्रवेश कराने के लिए (बालक / बालिका) शिशु की आयु प्रवेश के समय तीन वर्ष होनी आवश्यक है |
2. नर्सरी कक्षा में प्रवेश के समय जन्मतिथि हेतु जन्म प्रमाण पत्र तथा अभिभावक के पहचान पत्र की प्रमाणित प्रतिलिपि देना आवश्यक है |
3. ऊपर की कक्षाओं में प्रवेश हेतु रिक्त स्थान होने पर भाषा, गणित, अंग्रेजी तथा सामान्य ज्ञान की प्रवेश परीक्षा होती है | Learn More
पाठ्यक्रम एवं शिक्षण पद्धति
उच्च शैक्षिक स्तर के साथ-साथ सदगुणों का विकास भी हो यह बात वातावरण, क्रियाकलाप तथा शिक्षण व्यवस्था पर बहुत कुछ निर्भर करती है परन्तु पाठ्यक्रम एवं पाठ्य पुस्तकों का भी अपना विशेष महत्व है इस बात को ध्यान में रखकर CBSE व एन. सी. ई. आर. टी. का पाठ्यक्रम एवं पाठ्य पुस्तकें तथा अतिरिक्त विषयों का अपना पाठ्यक्रम एवं पाठ्य पुस्तकों की रचना की गई है | Learn More
परीक्षा कार्यक्रम
केवल परीक्षा उत्तीर्ण करना ही उद्देश्य ना मानते हुए शिशु के ज्ञानात्मक, बोधात्मक, भावात्मक एवं क्रियात्मक पक्ष के मूल्यांकन की व्यवस्था की गई है | यह कार्य आचार्यों द्वारा सतत होता रहता है | तीन द्विमासिक परीक्षण () अर्धवार्षिक तथा वार्षिक परीक्षा के आधार पर कक्षोन्नति होती है | पंचम कक्षा में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त करने वाले शिशुओं की प्रदेश स्तर पर मेधावी छात्र योग्यता परीक्षा होती है |Learn More
विविध क्रियाकलाप
प्रत्येक शिशु अनेक प्रतिभाओं का धनी है| गुणों एवं प्रतिभाओं के विकास के लिए आवश्यक है उसे उचित अवसर एवं वातावरण प्रदान करना | शिशु में अनेक गुण विद्यमान होते हैं परंतु योग्य वातावरण मिलने पर ही वे विकसित होते हैं| विद्यालय का वातावरण संस्कारक्षम रहे, इसके लिए शिक्षण के साथ-साथ निम्नांकित क्रियाकलाप भी शिशु मंदिर योजना के अंग है – स्वच्छता सज्जा, खेलकूद, व्यायाम योग, प्रार्थना सभा..Learn More
शुल्क
निर्धारित वार्षिक एवं मासिक शुल्क की सूचना अलग पत्रक द्वारा दी जाती है | शुल्क सम्बन्धी अन्य सूचनाएं इस प्रकार से है |
विद्यालय का समय
सत्र :- सत्र 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है | 21 मई से 30 जून तक ग्रीष्मावकाश रहता है |
समय :-
ग्रीष्मकालीन – प्रातः 8:00 से 1:30 बजे तक
शीतकालीन – प्रातः 8:30 बजे से 2:30 बजे तक
नर्सरी, के.जी.व प्रथम कक्षा का शनिवार को अवकाश रहता है | शेष कक्षाएं सोमवार से शनिवार तक लगती हैं | शिशु की प्रतिदिन उपस्थिति आवश्यक है |Learn More
शुल्क सम्बन्धी नियम
1. शुल्क सम्पूर्ण सत्र अर्थात् अप्रैल से मार्च तक का मासिक जमा होता है |
2.सम्पूर्ण शुल्क अग्रिम भी जमा कराया जा सकता है |
3. वाहन की व्यवस्था होने पर उसका शुल्क अलग से देय होता है |
4. स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टी. सी.) लेते समय सितंबर/ मार्च तक का शुल्क का शुल्क देना होता है |
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शुल्क जमा करने की तिथि
1. शुल्क प्रत्येक मास की दिनांक 5 से 10 तक लगातार तथा दिनांक 15 व 20 को जमा होगा, इसके बाद दिनांक 25 व मासान्त तिथि को विलंब शुल्क के साथ ही शुल्क जमा होगा |
2. मास के अंतिम कार्य दिवस तक शुल्क जमा ना होने पर नियमानुसार नाम पृथक हो जाएगा | पुनः प्रवेश शुल्क तथा शेष शुल्क के साथ आगामी मास की दिनांक 10 तक ही पुनः प्रवेश हो सकेगा | Learn More
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